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महाशिवरात्रि के पावन पर राज्य में झापामुंडी व गुड़, चने का मेला शुरू, पांच माह के मेले के लिए जंगलाती योद्धाओं ने कसी कमर

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स्वरुप पुरी /सुनील पाल 

आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व है, इस पर्व पर देशभर में शिव-पार्वती की आराधना की जा रही है। वहीं उत्तराखंड राज्य की बात करें तो “बाबा केदार” के इस राज्य में आज से एक विशाल मेला शुरू होने जा रहा है। 5 महीनो तक चलने वाले इस मेले को लोग “फायर सीजन” के रूप में भी जानते हैं। 15 फरवरी से 15 जून तक यह मेल चलता है। इसको लेकर राज्य भर के सभी वनप्रभागों, सेंचुरियों व टाइगर रिजर्व ने अपनी तैयारी समय से पहले ही पूर्ण कर ली थी। सरकार भी इस मेले में सहयोग करती है। राज्य की बात हम करें तो यह राज्य देशभर में “ऑक्सीजन डिपो” के रूप में जाना जाता है मगर फायर सीजन इस राज्य के लिए एक बड़ा संकट बनकर आता है। हर वर्ष हजारों हेक्टेयर जंगल वनाग्नि की भेंट चढ़ जाते हैं।पहाड़ी क्षेत्रों में लगने वाली वन अग्नि एक बड़ी चुनौती होती है, इससे निपटना जंगलाती खाकी के सिपाहियों के लिए बड़ा संकट भरा होता है। पहाड़ हो या मैदान “झापा मुंडी” एक ऐसा जादुई शस्त्र है जिससे बड़ी-बड़ी वन अग्नि को काबू किया जाता है। विषम परिस्थितियों में लंबी चलने वाली वनाग्नि को बुझाना एक बड़ी चुनौती होता है, ऐसे में वनकर्मी झापा,पानी व गुड़ चने के सहारे कई दिनों तक इस वन अग्नि से जूझते रहते है। मकसद एक..जंगलों की रक्षा व देश के ऑक्सीजन डिपो को बचाना।

वन्य जीव संरक्षण व पर्यावरण को बचाने के लिए वन महकमा कर रहा जागरूक

बीते कुछ वर्षों की बात करें तो राज्य वन महकमा जंगलों को बचाने के लिए विभिन्न स्थानों पर वन गोष्ठीया आयोजित कर रहा है। जंगलों में आग लगाने वाले शरारती तत्वों पर भी कठोर कार्रवाई कर रहा है। इसको लेकर पहाड़ हो या मैदान जगह वन गोष्ठीया व जागरूकता अभियान चलाये जा रहे हैं।पहाड़ी क्षेत्र की बात करें तो यहां लगने वाली जंगलों में आग बड़ा संकट लेकर आती है खड़ी पहाड़ियों में आग बुझाना एक बड़ी चुनौती होता है। पूर्व में कई घटनाएं ऐसी भी हुई हैं, जिसमें कई वन कर्मियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। पौड़ी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी हो या फिर कुमाऊं मंडल के अनेक जिले यहां पर पिछले कई महीनो से विभिन्न पंचायतो, शिक्षण संस्थानो में वन कर्मी वन गोष्ठीया आयोजित कर रहे हैं। टिहरी जिले की बात करें तो यहां पर दिसंबर माह से ही गोष्ठियों का आयोजन शुरू हो चुका था। तो कह सकते हैं वन महकमा पूरी तौर पर फायर सीजन को लेकर तैयार है। अब जिम्मेदारी स्थानीय लोगों पर भी है, वें शरारती तत्वों पर नजर रखें और राज्य के इस ऑक्सीजन डिपो को बचाने में अपनी अहम भूमिका भी निभाएं। बहरहाल इससे इतर सभी वन प्रभागो के योद्धाओं की फौज आधुनिक संसाधनों व झापामुंडी, व गुड चने के साथ तैयार है।

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