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खदेड़ने की परिपाटी बनी एक महकमें की परंपरा, घायल हाथी की मॉनिटर्निंग का बहाना

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स्वरुप पुरी /सुनील पाल 

राज्य वन महकमा वन्य जीव संरक्षण व संवर्धन को लेकर भले ही कितने प्रयास करें,मगर सिस्टम में मौजूद कुछ बागड़बिल्ले ऐसे भी हैं, जो लगातार इस सिस्टम को तार- तार कर रहे हैं। गढ़वाल मंडल के एक बहुत बड़े वन प्रभाग में कुछ दिनों पूर्व एक विशालकाय गजराज गंगा तट पर घायल अवस्था में मिलता है, मगर उसके बावजूद भी हालातो का बहाना बनाकर उसका उपचार नहीं किया जा रहा है। सिस्टम में मौजूद उच्च श्रेणी के लोग,सिर्फ इसकी मॉनीटरिंग की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ दे रहे हैं। मकसद यह की यह गजराज उनकी सीमा से हट जाए। जंगली गजराज इन दिनों लाचार, बेबस सा घूम रहा है। किसी कारणवश यह वन्य जीव घायल हो गया था। अब जब घायल हुआ है तो इसका निरीक्षण व रिपोर्ट तो बनानी ही है। रिपोर्ट के बहाने इस पर नजर तो रखी जा रही है, मगर इसका इलाज शुरू नहीं किया जा रहा। दरसल इस गजराज की बदकिस्मती ऐसी है कि,वह एक ऐसे क्षेत्र में घायल हुआ है जहां पतित पावनी गंगा से सट कर चार रेंज मिलती है।

पूर्व के अफसरों ने घायल वन्यजीवो का इलाज कर की मिसाल पेश, तो अब ऐसा क्यों नहीं ?

वहीं मैदानी छेत्रो की बात करे तो पूर्व में कई घटनाए ऐसी हुई है, जब यहां तैनात जाबांज अफसरों व डॉक्टरो की टीमों ने बड़े बड़े गजराजो का बेहतरीन इलाज किया है। मोतीचूर रेंज मे घायल अवस्था में मिले विशालकाय हाथी टीपू का इलाज एक बहुत बड़ी चुनौती था। परिणाम जो भी हो मगर अफसरों ने मौक़े पर इसका इलाज किया। चीला में मौजूद जंगली राजा हाथी को तो दो बार हरिद्वार की घनी आबादी से ट्रेंकुलाइज कर जंगलो में ले जाया गया। पर अब ऐसा क्यों नहीं।

कहां है डॉक्टरो की टीम,कब शुरू होगा इलाज, या मॉनिटरिंग की छत्रछाया में भगवान भरोसे कटेगी इसकी जिंदगी 

मीडिया द्वारा इस प्रकरण को उछाले जाने के बाद भी सिस्टम अब तक मौन है। मगर अब तक इसके इलाज को लेकर कोई सार्थक पहल शुरू नहीं की गयी है। कहां है वें लाखों रूपये वेतन पाने वाले “धरती के भगवान” क्या सिर्फ निरीक्षण से ही काम चल जाएगा। ज़नाब इन कुर्सीयो की एवज में आप मोटा वेतन सरकार से वसूल रहे है। निरीक्षण व इलाज के दौरान आपकी सेवा सत्कार के लिए वनकर्मी तैनात रहते है। आखिर किस लिए, करो अभियान शुरू, साथ ही उन लोगो को भी रडार में लाओ, जो खदेड़ने की परिपाटी पर कार्य कर रहे है। अगर ऐसा न होता तो यह घायल गजराज कुछ दिनों के भीतर कई रेंजो का सफऱ न करता।

“इस सीजन मे कुछ हाथी मद मे होते है सम्भवत यह भी रहा होगा और आपसी संघर्ष मे घायल हुआ होगा, हाथी अभी स्ट्रेस मे है, मोतीचूर और गोहरी रेंज मे निगरानी टीम का गठन कर इसकी निगरानी की जा रही है, ताकि यह आबादी की ओर ना जा सके, हाथी अभी सही से खा पी रहा है।”

कोको रोसे, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व।

 

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