स्वरुप पुरी /सुनील पाल
अपने बाघो व जंगली गजराजो के लिए विश्वप्रसिद्ध राजाजी टाइगर रिजर्व के सभी पर्यटन गेट आज से सैलानियों के लिए बंद कर दिए गए है। हर वर्ष बरसात के दौरान पांच माह के लिए सभी गेटो को सुरक्षा की दृस्टि से बंद किया जाता है। अब सभी सफारी गेट पंद्रह नवम्बर को फिर से सैलानियों के लिए खोले जाएंगे। राजस्व की दृस्टि से देखे तो इस वर्ष 1 करोड़ 28 लाख का राजस्व महकमे ने अर्जित किया। यह राजस्व पिछले वर्ष से पांच लाख ज्यादा है। वहीं 51 हजार के करीब सैलानी यहां पंहुचे, जिसमे 2400 से ज्यादा विदेशी पर्यटक थे।

यह वर्ष वन्य जीव पर्यटन के हिसाब से भले ही बेहतर रहा हो मगर वन छेत्रो मे मोबाइल ले जाने पर लगे प्रतिबंध से पर्यटक मायूस नजर आये। मगर वन कर्मियों के बेहतरीन तालमेल से लगातार सैलानियों की संख्या मे इजाफा होता रहा। चीला रेंज मे इस बार बीस हजार से ज्यादा सैलानी पंहुचे। जिसमे 1100 से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल थे, वहीं इस बार शुरू हुई हाथी सफारी ने भी पर्यटको को आकर्षित किया, चीला गेट ने बावन लाख तेरासी हजार राजस्व अर्जित किया तो वहीं

गुलदारो के लिए प्रसिद्ध रानीपुर सफारी गेट ने बीस लाख राजस्व प्राप्त किया।

हाइवे से कटे होने के बावजूद भी मोतिचूर रेंज ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। हाल ही मे निर्मित नया सफारी गेट सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहा। सफारी ट्रैक पर बना नया वाटर होल व उसमे मौजूद जंगली गजराजो के झुण्ड पर्यटको के लिए बेहतरीन अनुभव भरे रहे। मोतिचूर रेंज ने तेरह लाख के करीब राजस्व अर्जित किया। इन सब के साथ देहरादून सीमा पर स्थित चीलावली रेंज अब पर्यटको के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन रही है। यहां 41 लाख से ज़्यदा राजस्व अर्जित होना भविष्य के लिए बेहतर संकेत है।
नियमो की अवहेलना पर झिलमिल पर्यटन जोन मे दो सफारी वाहनो पर कारवाही
राजाजी के सभी गेट बंद हो जाने के बाद अब हरिद्वार आने वाले सैलानी झिलमिल झील पर्यटन ट्रैक का रुख करेंगे। हरिद्वार वन प्रभाग के रसियाबढ़ स्थित यह गेट आगामी तीस जून तक खुला रहेगा। यह पर्यटन जोन अपने बारहसिंघो के लिए विख्यात है। वहीं आज नियमो की अवहेलना करने पर वन अधिकारियों द्वारा दो सफारी वाहनो को इस सीजन के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही सभी जिप्सी संचालको को नियमो का पालन करने की हिदायत भी दी गयी है।








