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शेर आया शेर आया के बीच आ गई शेरनी, एक ओर गुलदार तो दूसरी ओर वनो के मुखिया… चर्चा बनी कॉमेडी

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स्वरुप पुरी /सुनील पाल 

राज्य का वन महकमा इन दिनों जमकर चर्चा मे बना हुआ है। हर रोज कोई एक नया किस्सा वन महकमे के लिए एक नई आफत पैदा कर देता है। मंगलवार को भी दिन भर राज्य मे एक गुलदार व एक शेर की जम कर चर्चा होती रही। प्रकरण भले ही राज्य के पौड़ी जनपद से जुडा हो मगर चर्चा पड़ोसी जिले टिहरी की होती रही। देर शाम तक टिहरी के प्रकरण ने जम कर सुर्खिया बटोरी। अब विस्तार से दिन भर के घटना क्रम को देखते है………सुबह पौड़ी मुख्यालय से सटे एक गाँव मे एक गुलदार ने एक महिला को अपना निवाला बना लिया। कुछ महीनो से लगातार ऐसी घटनाए यहां लगातार घट रही है। दस से ऊपर लोग काल कवलित हो गए, तो मंगलवार को एक बार फिर घटी घटना ने लोगो को भड़का दिया। सूचना मिलते ही सैकड़ो लोग घटना स्थल मे जुट गुये। एक ओर शव तो दूसरी ओर गुलदार। डीएफओ मौके पर पहुंचे तो एक ओर खाई तो दूसरी ओर कुंआ। साहब ने जम कर जनता की फटकार सुनी। मगर गुलदार की किस्मत खराब थी या कहें साहब की किस्मत अच्छी थी जो की शिकारीओ ने तुरंत गुलदार को मौके पर ही ढेर कर दिया। जनता का गुस्सा थोड़ा शांत तो हुआ, मगर दोपहर ढलते ही प्रदेश के मुखिया का एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ की सत्ता से जुड़े सभी लोगो की नींद हराम हो गयी।

पौड़ी मे शेर आया, शेर आया के नारों के बीच, नरेंद्र नगर की शेरनी ने उड़ाया गर्दा 

कुछ दिनों पूर्व पौड़ी दौरे के दौरान शेर आया शेर आया डायलॉग ने प्रदेश मे जम कर सुर्खिया बटोरी। अब मुखिया भी क्या करे , उन्हें क्या पता चमचों की भी अपनी दुकान है। जब नारे लगाएंगे, तभी तो महत्व पाएंगे। नारे के साथ सोसल मीडिया मे चमकेंगे तो तभी विभागीय ट्रांसफर पोस्टिंग वाले पूछेंगे, मगर वहां तो मुखिया ने फटकार लगा दी, मगर मंगलवार को तो मामला ही बिगड गया। नरेंद्र नगर मे मुखिया ज़ब एक स्थानीय चुनाव के मतदान स्थल पर पहुंचे तो रसगुल्लो(चमचो ) ने मामला बिगाड़ दिया। मुखिया के निरीक्षण की आड़ मे एक महिला पर ही रोब ग़ालिब कर दिया। मगर यह दांव उल्टा पड़ गया, मौके पर मौजूद धुरंदर महिला भी एक क्षेत्रीय दल से थी तो मौक़े पर ही सुर आलाप दिए। सुर ऐसे अलापे की थोड़ी देर मे ही प्रदेश के हर कोने मे चर्चाओ का बजार गर्म हो गया। मुखिया से ज्यादा चापलूसों की चर्चा अब पुरे प्रदेश मे है। वहीं जनता भी जम कर मौज ले रही है, भाई क्यों न ले, अगले वर्ष चुनाव जो है। मगर इस बीच मानव वन्य जीव संघर्ष मे फसी जनता का क्या होगा। यह गंभीर विषय अब भी बना हुआ है।

 

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