स्वरुप पुरी / सुनील पाल
वर्षा ऋतू के दौरान मैदानी छेत्रो मे सापों से निपटना वन महकमे के लिए एक प्रमुख चुनौती होती है। क्विक रिस्पांस टीम ज़ब मौक़े पर पंहुंचती है तो उन्हें आपात स्थिति मे रेसक्यू अभियान चलना पड़ता है। वहीं ऐसी परिस्थिति मे कोन सा सर्प विषैला है की नहीं यह पहचान होना भी जरूरी होता है। इसको लेकर राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज मे हरिद्वार वन प्रभाग द्वारा विभिन्न रेंजो से आई क्विक रिस्पांस टीमों को प्रशिक्षित किया गया। वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक व हर्पटॉलोजी विशेषज्ञ डॉ अभिजीत ने प्रतिभागियो को विषैले व गैर विषैले साँपो की पहचान, सुरक्षित रेसक्यू तकनीक, मानव सर्प प्रबंधन, प्राथमिक उपचार व बचाव से संबंधित गुरु सीखाए।

पिछले छह वर्षो मे आठ हजार से ज़्यदा वन्यजीवो को किया रेसक्यू
हरिद्वार वन प्रभाग की बात करें तो यहां की विभिन रेंजो मे वर्ष 2020 से अब तक 8343 वन्यजीवो को रेसक्यू किया जा चुका है। 6579 साँपो को पकड़ने के साथ ही 466 (सांभर , नीलगाय, चीतल ), 399 बंदर, 262 मगरमछ, 233 मॉनिटर लीजर्ड व 240 पक्षी अब तक रेसक्यू किए गए है। कार्यक्रम मे चीला वन क्षेत्रधिकारी दीपक रावत, हरिद्वार आरओ शिशपाल सौंडियाल, आरो चिड़ियापुर महेश शर्मा सहित विभिन्न रेंजो के वन कर्मी शामिल रहे।
“आगामी मानसून सीजन को देखते हुए सभी क्विक रिस्पांस टीमों को प्रशिक्षित कर दिया गया है, आमजन से अपील है की किसी भी साँप व अन्य वन्यजीव के दिखने पर उसे नुक्सान न पंहुचाए, उसकी तुरंत सूचना वन महकमे को दे, हमारी टीम तत्काल मौके पर पंहुच उसे रेसक्यू करेगी।”
स्वप्निल अनिरुद्ध, डीएफओ हरिद्वार








